Some parties consider Muslims as just vote banks', Indresh Kumar said - Hindus and Muslims will first resolve issues through dialogue, otherwise they will go to court

'कुछ दलों ने मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझा', इंद्रेश कुमार बोले- हिंदू और मुस्लिम पहले संवाद से सुलझाएंगे मसले, नहीं तो कोर्ट जाएंगे

RSS के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कहा कि मुसलमान पर एक दाग लगा है। ये कुछ पार्टियों ने लगाया जो मुसलमान को देशद्रोही और बिका हुआ मानती हैं। यही कारण है कि वे पार्टियां मुसलमान पर सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करती हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए जरूरी है कि मुसलमान समझें कि वो कोई बिकने वाले नहीं वो राष्ट्रवादी हैं।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने कहा कि जो भी मसले आएंगे, उन्हें संवाद के जरिये सुलझाया जाएगा। जब लगेगा कि संवाद से बात नहीं बन रही है, तो न्यायालय जाएंगे।

 

कुछ विपक्षी दल दंगे कराने की कर रहे कोशिश

ज्ञानवापी का मुद्दा दोनों पक्ष कोर्ट लेकर चले गए। इससे झगड़े और नुकसान कम हो गए। हिंदुस्तान को दस साल पहले दंगों का देश माना जाता था। कुछ विपक्षी दल अब भी कोशिश करते हैं कि दंगा हो जाए, लेकिन हम नहीं होने देंगे।

पार्टियां मुसलमान को सिर्फ वोट बैंक मानती

इंद्रेश कुमार शुक्रवार को आकाशवाणी के रंग भवन सभागार में एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुसलमान पर एक दाग लगा है। यह दाग लगाया है देश की कुछ पार्टियों ने, जो मुसलमान को देशद्रोही और बिका हुआ मानती हैं। यही कारण है कि वे पार्टियां मुसलमान को सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लायक समझती हैं। इसलिए जरूरी है कि मुसलमान समझें कि वो कोई बिकने वाली चीज नहीं हैं, वो राष्ट्रवादी हैं। उन्होंने 142 करोड़ भारतीयों के डीएनए को एक बताया।

 

हमारी पहचान देश से होती है, न कि धर्म सेः इंद्रेश

कार्यक्रम में आल इंडिया इमाम आर्गेनाइजेशन के चीफ इमाम डा. उमेर इलियासी ने कहा कि अयोध्या में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में जाने पर मेरे खिलाफ तीन फतवे जारी हुए। कुफ्र के फतवे से मैंने इन्कार कर दिया, क्योंकि यह इस्लामिक देश नहीं धर्म निरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश है। उन्होंने कहा कि हमारी पहचान देश से होती है, न कि धर्म से।

अजमेर दरगाह के सज्जादे नशी और दीवान हजरत सैय्यद जैनुल आबेदीन ने कहा कि सीएए किसी व्यक्ति और धर्म के खिलाफ नहीं है। ऐसे कानून दूसरे देशों में भी है। उन्होंने चुनौती दी है कि कोई साबित करके दिखाए कि सीएए मुसलमानों के खिलाफ है।

 



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