Religions are different but our roots are same, Government of India and Muslim Manch have same thinking: Indresh Kuma

धर्म अलग लेकिन हमारी जड़ें एक हैं, भारत सरकार और मुस्लिम मंच की सोच एक जैसी: इंद्रेश कुमार

हमारे धर्म अलग हैं लेकिन जड़े एक हैं। भारत सरकार व मुस्लिम मंच की सोच एक जैसी है। दोनों ही देश के हित में काम करते हैं। दोनों ने ही आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई है। अपने वंशावली को जानेंगे तो पाएंगे कि कुछ पीढ़ी पहले हम कौन थे हमारा गोत्र क्या था? हमारे पूर्वज का परिवार व बाकी लोग कहां हैं?

हमारे धर्म अलग हैं, लेकिन जड़े एक हैं। भारत सरकार व मुस्लिम मंच की सोच एक जैसी है। दोनों ही देश के हित में काम करते हैं। दोनों ने ही आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई है। अपने वंशावली को जानेंगे तो पाएंगे कि कुछ पीढ़ी पहले हम कौन थे, हमारा गोत्र क्या था? हमारे पूर्वज का परिवार व बाकी लोग कहां हैं? अगर उनसे मुलाकात को यथासंभव बनाएं तो हम देश की एकता अखंडता में विश्वास रखने वाले हो जाएंगे। ये बातें इंदिरापुरम के कैलास मानसरोवर भवन में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की ओर से आयोजित जड़ों से जुड़े कार्यशाला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहीं।

 

डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि जो हमारे देश व हमें कम्युनल कहते हैं वह गलत हैं। इन संस्था, राजनीतिक पार्टियों व आलोचकों को आज के भारत को समझना होगा। हाल में हुए रूस-यूक्रेन, इजरायल-हमास युद्ध में भारत ने आतंकी हमले की निंदा की थी। युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों में मदद भेजी थी। कोरोना काल में निशुल्क वैक्सीन देकर दूसरे देशों की मदद की।

 
भारत सरकार व मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने एक ही स्वर में कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में पनप रहा आतंकवाद अमानवीय था और रहेगा। हम कट्टरवादी व मजहबी बनेंगे तो विषैले बनेंगे। भारत सरकार ने गाजा में अनेकों ट्रक दवाओं, कपड़ों, अनाजों का जखीरा भेजा। उन्होंने जी-20 के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ करते हुए इसे अभूतपूर्व बताया। कहा कि हमारा देश प्रदूषण मुक्त व देशवासी प्यार करने वाला होना चाहिए।

सभी मजहबों में आपस में प्यार होना चाहिए। इससे सभी को तालीम व तरक्की मिलेगी। उन्होंने देश के सभी क्षेत्रों से आए लोगों से जाति, भूगोल, गांव, मोहल्ले में जाकर संवाद करने की अपील की, जिससे सद्भावना की दिवाली, ईद व क्रिसमस एक साथ मनाया जा सके। कार्यशाला में मंच के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद अख्तर, मोहम्मद अफजाल, अबु बकर नकवी, इस्लाम अब्बास, स्वामी मुरारी दास, खुर्शीद रजाका आदि मौजूद रहे।

तलाक समेत विभिन्न मुद्दों पर की चर्चा

मंच के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार की अध्यक्षता में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने अपनी दो दिवसीय कार्यशाला में सर्वसम्मति से मुहर लगाई। इस दौरान श्री राम, यूसीसी, तलाक, हिजाब, विवादित भूमि पर इबादतगाह, पूर्वजों, परम्पराओं, संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और भारतीयता के मुद्दों पर अहम फैसले लिए गए। साथ ही राष्ट्र विरोधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की वकालत की गई।

मुस्लिम मंच करेगा राम मंदिर की यात्रा

उन्होंने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने से पहले मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने राम मंदिर जाने के लिए यात्रा करने का निर्णय लिया था। जनवरी में करीब तीन सौ लोग प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। 20 फरवरी से चित्रकूट, झांसी, उन्नाव, राजस्थान व अन्य प्रांतों से लोग राम मंदिर जाएंगे। इनमें पैदल, साइकिल, स्कूटर, बाइक, कार व अन्य वाहनों से लोग पहुंचेंगे।

यूसीसी से 'इस्लाम और मुसलमानों को कोई खतरा नहीं

डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से किसी की धार्मिक पहचान को खतरा नहीं है और कुछ नेताओं ने इसका फायदा उठाकर मुसलमानों को भड़काया है। यूसीसी से इस्लाम और मुसलमानों को कोई खतरा नहीं है। भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि भारत के हर राज्य में विविधता है, इसलिए राज्य के हिसाब से यूसीसी का गठन किया जाना चाहिए।

अभी इस पर केंद्रीय कानून बनाने की अनुमति नहीं दी गई है। इसे इसी में रखा जाना चाहिए ध्यान रखें कि यूसीसी से किसी की धार्मिक पहचान, जाति पहचान या भाषा पहचान को कोई खतरा नहीं है। कुछ नेता मुसलमानों को निशाना बनाकर उन्हें भड़काने की कोशिश करते हैं।

मैं सभी मुसलमानों को आश्वस्त करता हूं कि यूसीसी उनका सम्मान बढ़ाता है और सुरक्षा की गारंटी देता है। अखिलेश यादव ने कहा कि 22 जनवरी के बाद वे एक साथ अयोध्या जाएंगे। उद्धव ठाकरे ने भी कहा कि वह जाएंगे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे बाद में राम मंदिर जाएंगे. मां काली और वहां राम मंदिर कार्यक्रम आयोजित करेंगे। दिल्ली के सीएम केजरीवाल की पार्टी ने भी कहा कि वे सुंदरकांड का पाठ करेंगे।

राम मंदिर और नाथूराम गोडसे पर उनकी हालिया टिप्पणियों के लिए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की आलोचना करते हुए, आरएसएस नेता ने कहा कि मुसलमान ओवैसी को आधा फीसदी भी वोट नहीं देते हैं। उन्होंने कहा, जो लोग कह रहे हैं कि यूसीसी और हल्द्वानी के बीच संबंध है, वे सच्चाई से परे हैं। यह एक अतिरिक्त साजिश है, जिससे उत्तराखंड का सौहार्द, भाईचारा और प्रगति खराब हो सकती है। सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है।

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